🧚🏻‍♀ *कही  खो गयी है मेरी गुडिया*🧚🏻‍♀

शायद दुनिया के इस मंजर में कही खो गयी मेरी गुढीया…
बस हसती रहे ये फिर्याद है दिल में…
हरवक्त बस ये बात रहती है दिल में…
कि कोई तोड ना दे मेरी गुढीया को…
पर शायद काही खो गयी है मेरी गुढीया…..😞

बहुत कूछ पाना है उसे,और बहुत कुछ सिखना….
बस क्यु आया ये खयाल कि अब और अब नाही उसे देखणा…
क्योकि शायद कही  खो गयी है मेरी गुढीया ….कहि खो गयी है मेरी गुढीया….😔

आस लगाये बैठा हू ,कही मिल जाये मेरी वाली गुढीया…..
जो इस समाज के राक्षस से  अंजान है….
बताया उसे हर वक्त कि बहुत बुरा है ये समाज ….
शायद हमारा हजार बार उसे बतना हि गलत था….
शायद कही खो गयी है मेरी गुढीया…शायद कहि 😟

जब ओह मुस्कुराती थी ,हम भी कभी मुस्कुराते थे दिल से….
पर न जाणे क्यो अब,मुस्कुराहट हि नाही आती चेहरे पर  और नाही दिल में…..
क्योकि शायद कही खो गयी है मेरी गुढीया ..मेरी गुढीया☹

मेरा तोह कुछ नहीं ,में एक सन्यासी हू…..
कब झोली लेकर निकल जाऊ पता नहीं….
पर शायद मुझमेही बहुत सारी कमीया होंगी…
जो मेरी गुढीया को संभाल ना पाया,और ढुंढ भी ना पाया…..😫

शायद मेरी हि गलती थी ….
क्योकि कहि खो गयी है मेरी गुढीया …कहि खो गयी है मेरी गुढीया…😢😢

✍🏻भाविन चौधरी

निरंतर बढणा है मुझे

ना थकना है मुझे …
ना झुकना है मुझे …
बस अपने ध्येय कि और…
निरंतर बढणा है मुझे…

कूछ अच्छी सी आदते…
और कभी ना रुकने कि ख्वाहिश दिल में…
बढ़ा रहि है मुझे मेरे ध्येय कि और…
बस निरंतर बढणा है मुझे…

किसी से नही कूछ लेना देना….
आखरी बुंद भी लहू कि भारत माँ के चरणो में हो…
यहि है ख्वाहिश मेरी …
बस निरंतर बढणा है मुझे ….मेरे ध्येय तक ….मेरे ध्येय तक

ना द्वेष किसी प्रति रखता हूं …
निस्वार्थ भाव से कार्य करना चाहता हू…
चाहे जो भी हो अंजाम …
बस निरंतर बढणा है मुझे …

बस निरंतर बढणा है मुझे….
मेरे ध्येय तक….मेरे ध्येय तक…

✍🏻✍🏻
*शब्द संग्रह:-भाविन मनोहर चौधरी*